बहुत ही आनंद आएगा पढ़े जरूर
ठाकुर जी ने एक बार ????”ताता” मिर्ची खायी, फिर बडो मजा आयो !
एक मधुर बाल लीला…..
ब्रजरानी यशोदा भोजन कराते-कराते थोड़ी सी छुंकि हुई मिर्च लेकर आ गई क्योंकि नन्द बाबा को बड़ी प्रिय थी।
लाकर थाली में एक और रख दई, तो अब ठाकुरजी बोले की बाबा हम आज और कछु नहीं खानो , ये खवाओ???? ये कहा है ? हम ये खाएंगे , तो नन्द बाबा डराने लगे की नाय-नाय लाला ये तो ‘ताता’ है , तेरो मुँह जल जावेगो , तो लाला बोलौे नाय बाबा अब तो ये ही ????खानो है मोय
ये बात सुन कें बाबा ने खूब ब्रजरानी यशोदा कूं डाँटो , कि मेहर तुम ये क्यों लैंके आई ? तुमकूं मालूम है ये बड़ो जिद्दी है , ये मानवै वारो नाय , फिर भी तुम लैंके आ गई !!!
अब मैया ते गलती तौ है गई , और इतकूं ठाकुर जी मचल गए बोले अब बाकी भोजन पीछे होयगो, पहले ये ताता ???? ही खानी है मोय, पहले ये खवाओ । बाबा पकड़ रहेैं , रोक रहे हते , पर इतने में तौ लाला उछल कें थाली के निकट पहुंचे और अपने हाथ से उठाकर मिर्च???? खा गये| और खाते ही ‘ताता’ है गयी; लग गई मिर्च, करवे लग गये सी~सी | वास्तव में ताता भी नहीं ” ता था थई ” है गई । अब लाला चारों तरफ भगौ डोले, रोतौ फिरे, ऑखन मे आँसू भर गये ,
लाला की रोवाराट सुन कें सखा आ गये , अपने सखा की ये दशा देख कें हंसवे लगे, और बोलें —- लै और खा ले मिर्च !!! भातई मिरचई ही खावेगो , और कछू नाय पायौ तोय खावेकूं |
मगर तुरत ही सबरे सखा गंभीर है गये , और अपने प्रान प्यारे कन्हैया की ‘ताता’ कूं दूर करिवे कौ उपाय ढूंढवे लगे |
इतकूं लाला ततईया को सों खायो भगौ डोले फिरे , सारे नन्द भवन में – बाबा मेरो मौह जर गयो , बाबा मेरो मौह जर गयो , मौह में आग पजर रही है????????अरि मईया मर गयौ , बाबा कछु करो कहतौ फिरौ डोलै !!!!और पीछे-पीछे ब्रजरानी यशोदा , नन्द बाबा भाग रहे है हाय-हाय हमारे लाला कूं मिर्च लग गई , हमारे कन्हैया कूं मिर्च लग गई ।
महाराज बडी मुश्किल ते लाला कूं पकड़ौ ;
(या लीला कूं आप पढ़ो मत बल्कि अनुभव करौ कि आपके सामने घटित है रही , फिर आवेगौ असली आनन्द ????????????)
लाला कूं गोदी में लैकें नन्द बाबा रो रहे है, और कह रहे है कि अरि महर अब तनिक बूरौ-खांड कछू तौ लैकें आ , मेरे लाला के मुख ते लगा | और इतनो ही नाय बालकृष्ण के मुख में नन्द बाबा फूँक मार रहे है । बडी देर बाद लाला की पीडा शान्त भई , तब कहीं जा कैं नन्दालय में सुकून परौ |
आप सोचो क्या ये सौभाग्य किसी को मिलेगा ? जैसे बच्चे को कुछ लग जाती है तो हम फूँक मारते है बेटा ठीक हे जाएगी वैसे ही बाल कृष्ण के मुख में बाबा नन्द फूँक मार रहे है ।
देवता जब ऊपर से ये दृश्य देखते है तो देवता रो पड़ते है और कहते है की प्यारे ऐसा सुख तो कभी स्वपन में भी हमको नहीं मिला जो इन ब्रजवासियो को मिल रहा है | और कामना कर रहे हैं कि आगे यदि जन्म देना तो इन ब्रजवासियो के घर का नौकर बना देना , यदि इनकी सेवा भी हमको मिल गई तो हम धन्य हो जाएंगे।